Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

दवा विपणन उद्योग में दक्ष व ईमानदार प्रबन्धकों की घोर कमी,बाजीगरों व चापलूसों ने कर लिया है कब्जा

🚩🚩🚩🚩🚩🚩
एक रिपोर्ट के अनुसार दवा प्रोत्साहन उद्योग में उच्च स्तर पर योग्य कॉरपोरेट प्रोफेशनल की घोर कमी है।दूसरी तरफ कॉरपोरेट स्तर पर बेरोजगार प्रबंधकों की लंबी लाइन लगी है।

दरअसल इस क्राइसिस के बीज 90 के दशक में ही बो दिए गए थे जब MR  को कम्पनी के अम्बेसडर की जगह सेल्स प्रोक्योरमेंट एजेंट बनाया जाने लगा। सेल्स प्रोफेशन में आपको पुराने लोग आज भी मिल जाएंगे जो रेलवे, पोस्ट आफिस की नौकरी छोड़कर MR की ग्लैमरस जॉब में चले आये।
अब तो साइंस ग्रेजुएट की जगह अन्य विधाओं यहां तक की स्नातक अनुतीर्ण लोग भी MR बनने लगे। 

अंग्रेजी बोलने ,लिखने की क्षमताएं दरकिनार की जाने लगी।यह सब इसलिए के यूनियन को कमजोर किया जा सके,ऐसे लोगों की भर्ती की जाने लगी जो प्रबंधन से सवाल न करे,उनकी कमियों को उजागर न करे और प्रबन्धन की सारी बातों पर Yes Sir Yes Sir Right Sir करे।

ऐसे ही कर्मवीरों में से वैसे लोगों जिन्हें 5-7 साल की नौकरी के बाद लगा कि अब उनका टारगेट नहीं होगा तो कुछ ने प्रोमोशन ले लिया।प्रमोशन लेने वालों में अधिकांश फकैत थे उनमें कुछ बेहतरीन कम्युनिकेश रखने वाले लोग भी थे जो और आगे बढ़ गए।

MR की वही जमात आज  लॉबी व चापलूसी(जिसे वे बेटर inter पर्सनल स्किल कहते हैं) के बल पर विभिन्न कम्पनियों में शीर्ष पदों पर विद्यमान हैं,न उनके पास कोई #Planning न #Implementation_Strategy  बनाने की योग्यता है न लीडरशिप के गुण, ये आला दर्जे के कामचोर, झूठी व काल्पनिक कहानियां गढ़ने में माहिर हैं।वो बस उलट पुलट(manipulation) की कला के उस्ताद हैं। फिगर्स व शब्दों की बाजीगरी में इन्हें महारथ हासिल होती है।

बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को छोड़ तमाम भारतीय दवा कम्पनियों पर इन बाजीगरों ने कब्जा कर लिया है।इनका काम बस मालिकों को सपने दिखाना,खुद के लिए बेहतरीन पैकेज का जुगाड़ करना और अपने चट्टे बट्टों के लिए मुफीद पदों की व्यवस्था करना है।ऐसे लोग न कम्पनी के वफादार होते हैं न अपने अधीनस्थ कर्मियों के लिए।किसी नई कम्पनी को जॉइन करते ही इनका पहला काम होता यह कहना के अभी तक जो हुआ वो गलत हु,फिर ये पुराने कर्मियों के मनोबल को गिराते, उन्हें शर्मसार करते व नौकरी छोड़ने को विवश करते।

शुद्धिकरण के नाम पर प्रमोशनल इनपुट्स को कम कर सेल्स को डाउन करते हैं व मालिकों को यह बताने की कोशिश करते कि पिछले लोगों ने false base खड़ा कर दिया उसे सही कर रहे हैं।इस प्रक्रिया में साल डेढ़ साल गुजर जाते हैं। फिर जब उनकी अपनी टीम पूरी तरह काबिज हो जाती तो वही पुराना खेल दोहराया जाता है और इस तरह एक डेढ़ साल और गुजर जाते हैं।

इस तरह तीन साल गुजरने के बाद ये पंक्षी की तरह नए ठिकाने की तलाश में लग जाते हैं।ऐसे प्रोफेशनल को fly by night Executive कहा जाता है इनको बेस्ट सेलर बुक Who mooved my cheese बहुत पसंद है।क्योंकि इस किताब ने उन्हें कुतरने के गुर दिखाई है ऐसे लोग मलाई खत्म होने के पहले ये नए ठिकाने की तलाश शुरू कर देते हैं।

ऐसा नहीं की मालिकों को ऐसे executives के बारे में पता नहीं है वो जान बूझकर ऐसे बाजीगरों के चक्रव्यूह में फंसते हैं क्योंकि ऐसे लोग एक मामले में ईमानदार हैं कि चाहे जैसे भी हो मालिकों का लाभ बढ़ाने की कला जानते हैं।ऐसे #Professionals से सबसे ज्यादा नुकसान ईमानदारी से काम करने वाले कर्मियों व स्वभिमानी लोगों को हुआ है।नतीजा है कि आज इस प्रोफेसन में योग्य व स्वभिमानी लोग आना पसन्द नहीं करते।ऐसे लोगों ने मालिकों को झांसा देकर अकूत धन कमाया है कम से कम 50 से ज्यादा ऐसे प्रोफेशनल हैं जिन्होंने ऐसी कमाई से खुद की कम्पनी खड़ी कर ली है।
तो #Dear सच यही है कि No Body Has Mooved Our Cheese  बल्कि आपके जैसे चूहों ने हमारे हिस्से की Cheese भी कुतर कुतर कर खा ली है। मेरी Cheese कुतर कर आप पहले से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं और हमपे ही आंखे तरेर रहे हैं। 
आपको यह भय सताने लगा है कि कम्पनी के पुराने व वफादार कर्मचारी मालिकों के सामने आपकी पोल न खोल दें। खैर हमारी छोड़िये अब तो बख्स दीजिये  साहब आप तो फिर निकल पड़ेंगे दूसरे ठिकाने को मरेगा मजदूर व कर्मचारी।
कम्पनी के मालिकों से भी गुजारिश है कि किसी नए प्रोफेशनल की नियुक्ति के पहले पूरी तहकीकात कीजिये उनकी जन्म कुंडली खंगालिए नहीं तो ये आपकी चढ्ढी उतारने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
😥😥😥😥🚩🚩🚩🚩

Post a Comment

1 Comments